Monday, March 22, 2010

In future, if cant handle your job proficiently, resign it, rather than defaming it

An example:
Surgeon denies manslaughter charges in Australia court
An American surgeon has denied three charges of manslaughter and another of grievous bodily harm at a court in the Australian city of Brisbane.

Jayant Patel replied "Not guilty, your honour" as the judge read each charge.

Prosecutors accuse him of incompetence and failing to declare that he had previously been reprimanded by medical boards in the United States.

The charges relate to Dr Patel's work at Bundaberg hospital in Queensland between 2003 and 2005.

If convicted, Mr Patel, 59, faces life in prison.

The Indian-born US citizen was extradited from the United States in 2008 to face the charges.

The trial is expected to take between four and six weeks and hear evidence from 90 witnesses.

Prosecutors allege that Dr Patel used outdated, inefficient surgical procedures while carrying out operations he had been banned from undertaking in the United States.

He is accused of removing a patient's bowel without good reason, and failing to staunch internal bleeding in an elderly man, who later died.

The BBC's Sydney correspondent Nick Bryant says the trial comes 25 years after questions were first raised about Dr Patel's competency

Wednesday, October 28, 2009

40 साल का हुआ इंटरनेट

नई दिल्ली। एक दौर था जब इंटरनेट के बारे में लोगों को सुनकर आश्चर्य होता था। लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के साथ आज दुनिया का शायद ही कोई ऐसा कोना होगा जहां लोग इंटरनेट पर निर्भर न हों। सूचनाओं के आदान-प्रदान का यह सर्वोत्ताम माध्यम गुरुवार को 40 साल का हो गया। वक्त के साथ इसका इस्तेमाल करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ। 1999 में पूरी दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या जहां 25 करोड़ थी वहीं 2008 में यह आंकड़ा एक अरब 50 करोड़ जा पहुंचा।

इंटरनेट की लोकप्रियता के बारे में शायद इसके जन्मदाता क्लीनराक ने भी यह कल्पना नहीं की होगी कि आने वाला समय इस कदर इंटरनेट पर निर्भर होगा। सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक, ट्विटर व आरकुट जैसी लोकप्रिय साइट लोगों के लिए जुनून बन जाएगी। लेकिन इसकी व्यापकता का नकारात्मक उपयोग भी बढ़ा है। आतंकी गतिविधियों, राष्ट्र विरोधी रणनीति और अन्य गैर कानूनी कार्यो को अंजाम देने की एक लंबी फेहरिस्त है। इसमें धमकी भरे ईमेल, प्रोनोग्राफी, हैकिंग, फर्जी वेबसाइट आदि शामिल हैं। साइबर मामलों के जानकार सुरेश गोयल कहते हैं, सकारात्मक चीजों के साथ नकारात्मक चीजें भी आती हैं। इंटरनेट भी इससे अछूता नहीं है, पर प्रौद्योगिकी के विकास के अनुरूप निगरानी रखने वाला तंत्र विकसित नहीं हो सका है।'

जन्म की कहानी अजीब

इंटरनेट के जन्म की कहानी भी थोड़ी अजीब है। अमेरिका के लास एंजिलिस स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में कंप्यूटर वैज्ञानिकों ने दो सितंबर, 1969 को 15 फुट लंबे तार से दो कंप्यूटर को आपस में जोड़कर सूचना का आदान प्रदान किया। 29 अक्टूबर, 1969 को लेन क्लीनराक ने इस परीक्षणों के माध्यम से इंटरनेट का सूत्रपात्र किया। क्लीनराक ने इंटरनेट के माध्यम से मात्र एक ही शब्द क्रैश [कंप्यूटर ठप] लिखा था। इसके बाद 1971 में रेय टोम्लिसन ने पहला ई-मेल भेजा। जनवरी, 1985 में डाट काम, डाट नेट, डाट ओराजी जैसे डोमेन तकनीक का विकास हुआ।

दो नवंबर, 1988 को व्यापक तौर पर इंटरनेट का पहली बार इस्तेमाल हुआ। 1990 में टिन बर्नर्स ली ने व‌र्ल्ड वाइड वेब [डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू] ईजाद की। आज इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले देशों में श्रेणी में भारत चौथे नंबर पर जबकि चीन शीर्ष पर है।

कंप्यूटर पर कठिन शब्द का अर्थ ढूंढ़ना होगा आसान

लंदन। ब्रिटेन में कंप्यूटर विशेषज्ञों ने एक नई तकनीक 'ओडब्ल्यूएल दो' ईजाद करने का दावा किया है। इससे कंप्यूटर में कठिन शब्दों का अर्थ ढूंढ़ना आसान होगा। डाक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिकों के लिए यह काफी उपयोगी होगी। इस तकनीक को आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। शोध प्रमुख आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. इयान होराक्स ने कहा,'आज का इंटरनेट जुडे़ हुए दस्तावेजों का संकलन है। नई तकनीक से कठिन शब्दों का अर्थ खोजने में आसानी होगी।'

Monday, October 12, 2009

डिफरेंट बनना है, तो डिफरेंट करो

अपने यहां एक कहावत बहुत मशहूर है, 'नौकरी करो सरकारी, नहीं तो बेचो तरकारी'। आपने भी सुना ही होगा। हम तरकारी और मोमोज 'बेचने' वाले दो ऐसे ग्रुप का जिक्र कर रहे हैं, जो गांव-देहात के आम किसान नहीं हैं, बल्कि इंटरनेशनल फेम इंस्टीट्यूट से एमबीए क्वालिफाइड टैलेंटेड होनहार हैं। मोटी तनख्वाह वाली नौकरी को ठेंगा दिखाकर इनलोगों ने वह काम शुरू किया, जिसे अब गांव के लोग भी करना नहीं चाहते। हिम्मत, विश्वास, पेशेंस, प्लानिंग और बिजनेस की हाइटेक टेक्निक के साथ बिहार के इन होनहारों ने सब्जी और चाइनीज फास्टफूड मोमोज का कारोबार शुरू किया। इस सफर में इन्हें कुछ परेशानियों को भी फेस करना पड़ा, पर जब दिल में आसमान छूने की तमन्ना जगी हो, तो इनके बढ़ते कदमों को कोई रोक नहीं सकता।

इस हाइटेक और कांपटीशन के दौर में एक ओर जहां लोग अपना पुश्तैनी काम करने को सोचने से भी कतराते हैं, वहीं कुछ वैसे भी हैं, जो अट्रैक्टिव पैकेज वाली नौकरी को ठुकराकर अपना बिजनेस बड़े शान से चलाते हैं। इसीलिए कहते हैं कि बिहार के टैलेंडेंट की कमी नहीं है। ये किसी भी फील्ड में जाएं, अपना लोहा मनवाने से पीछे नहीं हटते। हम जिन शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए पूरा करने के बाद अट्रैक्टिव सैलरी को ठुकराकर कुछ डिफरेंट करने की सोची। कौशलेंद्र और ओमप्रकाश ने एमबीए के दौरान ही यह डिसाइड कर लिया था कि इन्हें प्लेसमेंट में पार्टिसिपेट नहीं करना है।

2010 तक 100 करोड़ का टारगेट

कौशलेंद्र व ओमप्रकाश ने बताया कि हमारी तमन्ना सब्जियों को भी ब्रांड बनाने की है। जैसे डेयरी प्रॉडक्ट के रूप में 'सुधा' एक ब्रांड बन कर उभरा है, उसी तरह से वेजिटेबल्स में भी 'समृद्धि' एक ब्रांड बन कर उभरेगा। उन्होंने बताया कि कौशल्या फाउंडेशन के चेन खुलेंगे और केवल बिहार ही नहीं, यूपी और छत्तीसगढ़ में भी इसका विस्तार होगा। 2010 तक कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ पहुंचाने का टारगेट रखा है। उन्होंने बताया कि पिछले फाइनेंशियल इयर में कंपनी का टर्नओवर 89 लाख था तथा इस साल छह महीने में ही कंपनी का टर्नओवर डेढ़ करोड़ तक पहुंच गया है।

प्राइस कंट्रोल का है फंडा

छोटे किसानों की यह शिकायत होती है कि उनके प्रॉडक्ट का प्राइस एकाएक डाऊन हो जाता है। वजह होती है, एक साथ बड़ी मात्रा में प्रोडक्शन और उसके प्रिजर्व करने का इंतजाम न होना। इसके लिए कौशलेंद्र व ओमप्रकाश 'पॉलिहाऊस' प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस टेक्निक के जरिए किसी भी वेजिटेबल्स के प्रोडक्शन के टाइम को इस तरह मैनेज किया जाना संभव हो सकेगा कि उस समय में बड़ी मात्रा में इसका उत्पादन न हो। ओमप्रकाश ने इस बारे में बताया कि इस साल के अंत तक पांच पॉली हाऊस शुरू हो जाएंगे। एक पॉली हाऊस से पांच सौ किसानों को लाभ मिलेगा।

..और कारवां बनता गया

चूंकि कौशलेंद्र का फैमिली बैकग्राउंड फार्मिग रहा है। इसके लिए उन्होंने हर लेवल पर तैयारी की थी। जूनागढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज से एग्रीकल्चर में बी टेक की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद रही-सही कसर आईआईएम, अहमदाबाद से पूरी की। एमबीए की पढ़ाई पूरी होने के क्रम में बिहारी टैलेंट की एक जमात बन गई थी। सो पहले कौशलेंद्र ने बिहार से उपजने वाले वेजिटेबल को एक ब्रांड देने की सोची। इसमें इनका साथ दिया आईआईएम से ही पास ओम प्रकाश सिंह ने। उधर, एनएमआईएमएस, मुंबई से एमबीए कर चुके अनुज, एमएससी कर चुके धीरेंद्र एवं ग्रेजुएट हरेंद्र कुमार पटेल भी कौशल्या फाउंडेशन से जुड़ गए.

डेढ़ लाख से शुरू किया कारोबार

अपने स्कॉलरशिप की राशि और कुछ अन्य अवार्ड के तहत मिली राशि को कलेक्ट कर कौशलेंद्र और ओमप्रकाश ने इस कारोबार की नींव रखी। ब्रांड नेम रखा 'समृद्धि' और मदर एजेंसी के रूप में 'कौशल्या फाउंडेशन' को रजिस्टर्ड करवाया। लगभग 50 हजार रुपए की लागत से एक रेफ्रिजरेटेड वान बनवाया, जिसमें रखकर वेजिटेबल्स बाजार तक पहुंचाए जा सकते थे। ओमप्रकाश ने बताया कि पहले दिन का सेल था छह रुपए। हालांकि महीने के अंत तक यह राशि पांच सौ रुपए तक पहुंच गई. इसी महीने यह राशि करीब हजार रुपए तक जा पहुंची है। ओमप्रकाश का कहना है कि आज हर दिन करीब सत्तर हजार रुपए का करोबार हो रहा है। हर महीने स्टाफ्स पर 1.25 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। 25 लोगों को तो नौकरी मिली है और सत्तर लोग सीधे इससे जुड़े हैं। इनके अलावा पांच हजार किसानों को अपने प्रॉडक्ट को सीधे बेचने में सुविधा हो रही है।

आसमान छूने की चाहत

कहते हैं कि लीक से हटकर तीन लोग ही चलते हैं-शायर, शेर या फिर सपूत। कुछ लोग इसे सनक भी कहते हैं, क्योंकि जब जेब में पर मंथ 20-25 हजार रुपए आसानी से आ सकते हैं, वैसी स्थिति में लोग फांकाकशी की राह क्यों चलें? लेकिन इसीलिए तो ये दुनिया अजीब है और ह्यूमन नेचर के कारण कभी-कभी आदमी को रिस्क कवर करने में बड़ा मजा आता है। हां, इस रिस्क में कभी फायदा, तो कभी नुकसान होता है, लेकिन 'नो रिस्क, नो गेन' के फार्मूले पर चलने वालों के लिए लाइफ के मायने कुछ अलग होते हैं। ऐसी ही राहों पर निकल पड़े हैं बिहार के तीन यूथ-अमित सिन्हा, सुमन कुमार और उदय वत्स। तीनों का लक्ष्य एक ही है, बस नाम कमाना और अपने स्टेट के डेपलपमेंट के लिए काम करना।

एमबीए कर शुरू की इंटरप्रेन्योरशिप

अमित, सुमन और उदय तीनों ने केआर मंगलम इंस्टीच्यूट, दिल्ली से मास्टर्स इन बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई कंप्लीट की। कोर्स के दौरान तीनों को ही जॉब के ऑफर्स मिले, लेकिन टीचर्स के मोटिवेशन और कुछ अलग करने की चाह ने इन्हें वापस पटना ला दिया। यहां आकर तीनों ने खुद मार्केट सर्वे किया और चाइनीज फूड आइटम 'मोमोज' को लेकर एक बिजनेस प्लान बनाया। हालांकि इस प्लानिंग को ना फैमिली ने सपोर्ट किया और ना ही इनके कई फ्रेंड्स ने। लेकिन तीनों ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी और आज शहर के छह अच्छी लोकेशंस पर इनकी ट्रॉलियां लगती हैं, जहां पटनाइट्स मोमोज का लुत्फ शौक से उठाते हैं।

ओपनिंग विथ मिक्स वेज मोमोज

अभी तक आपने जहां भी मोमोज खाए होंगे, सिर्फ दो ही वेराइटीज मिली होगी-वेज मोमो और चिकेन मोमो। लेकिन इस हाइटेक ग्रुप ने 'यमी मोमोज' के नाम से जो चेन शुरू किया है, उसमें एक नई वेराइटी को इंट्रोड्यूस किया है। यह नई वेराइटी है 'मिक्स वेज मोमोज'। यह एक कंप्लीट न्यू वेराइटी है और यमी मोमोज के अलावा यह आपको कहीं और नहीं मिलेगी।

25 लोगों को मिला रोजगार

'मोमोज चेन' करने के पीछे मकसद के बारे में उदय बताते हैं कि कुछ ही दिनों पहले तक जॉब मिलना कोई मुश्किल बात नहीं थी, लेकिन एक बार रिसेशन आया और हाइली क्वालिफाइड और एक्सपीरिएंस्ड लोगों को भी अपनी जॉब से हाथ धोना पड़ा। ऐसे में क्यों ना हम कुछ ऐसा करें कि हमारे साथ कुछ और लोगों को इंप्लॉयमेंट मिले। वहीं सुमन ने बताया कि अगर हम कोई जॉब करते, तो अपनी फैमिली के लिए काम करते, लेकिन इस चेन के खुलने से अभी कुल 25 लोगों को रोजगार मिल पाया है। हालांकि अभी यह इनिशियल स्टेज है, आगे बहुत कुछ करना बाकी है।

पॉकेट मनी से की शुरुआत

अमित बताते हैं कि इस चेन को शुरू करने के लिए हमारे पास सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी इंवेस्टमेंट की। हमारे पास प्लान था और हमारे प्रोजेक्ट गाइड अश्रि्वन भाटिया का विश्वास। उन्होंने हमें बहुत सपोर्ट किया और हर हाल में इस प्रोजेक्ट को शुरू करने को कहा। उनकी उम्मीद के साथ हमने अपनी पॉकेट मनी के साथ छह महीने पहले इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की और मौर्या कांप्लेक्स, बोरिंग रोड, गांधी मैदान, खेतान मार्केट, एनआईटी और एक इंस्टीच्युट की कैंटीन में अपने काउंटर्स खोले।

Friday, August 21, 2009

Country wise english tests requirement

विदेश में पढाई और आंखों में कॉर्पोरेट व‌र्ल्ड का ऊंचा ओहदा, हर छात्र का सपना होता है। खासकर अमेरिका, यूके, फ्रांस, कनाडा, जापान जैसे किसी देश से पढाई करने के बाद न केवल एक्सपोजर मिलता है, बल्कि बडी व मल्टीनेशनल कंपनियों में आसानी से नौकरी भी मिल जाती है। लेकिन विदेश में पढाई करने के लिए आपको टीओईएफएल, आईईएलटीएस, जीएमएटी, जीआरई जैसे एग्जामिनेशन के चक्रव्यूह को भेदना होगा।

यूनेस्को की रिपोर्ट

यूनेस्को की हालिया रिपोर्ट ग्लोबल एजुकेशन डाइजेस्ट-2009 के मुताबिक चीन के बाद सबसे अधिक भारतीय छात्र ही विदेश पढाई करने जाते हैं। जहां तक टॉप स्टडी डेस्टिनेशन की बात है, तो इसमें अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और जापान प्रमुख हैं। रिपोर्ट के मुताबिक , पहले अमेरिका भारतीय छात्रों का मुख्य स्टडी डेस्टिनेशन हुआ करता था। तकरीबन 71 फीसदी भारतीय छात्र अमेरिका पढने के लिए जाते थे। इसके बाद 8 प्रतिशत यूके और 7.6 प्रतिशत ऑस्ट्रेलिया। लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जापान, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, चीन और साउथ कोरिया भी भारतीय छात्रों के पसंदीदा स्टडी स्पॉट बनते जा रहे हैं। वहीं उद्योग चेंबर एसोचैम के मुताबिक, प्रति वर्ष करीब पांच लाख भारतीय छात्र पढाई के लिए विदेश का रुख करते हैं।

किस देश में कौन-सा टेस्ट

यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन के लिए टॉफेल, जीआरई, जीमैट और एसएटी स्कोर मान्य हैं। यूके के संस्थानों में एडमिशन के लिए जीसीई क्लियर करना पडता है। कनाडा, आयरलैंड व न्यूजीलैंड जैसे देशों में पढने के लिए टॉफेल या आईईएलटीएस पर्याप्त है। आप ऑस्ट्रेलिया की तरफ रुख करने की सोच रहे हैं, तो यहां के सभी शैक्षणिक संस्थानों में आईईएलटीएस का स्कोर मान्य है।

इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम

(IELTS)

आईईएलटीएस एग्जाम के जरिए कैंडिडेट्स के अंग्रेजी ज्ञान को जांचा-परखा जाता है। इस परीक्षा का आयोजन ब्रिटिश काउंसिल, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, ईएसओएल और आईडीपी एजुकेशन, ऑस्ट्रेलिया द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।आईईएलटीएस स्कोर ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका के शैक्षणिक संस्थानों के अलावा, कुछ अमेरिकी संस्थानों में भी मान्य हैं।

www.ieltsindia.com

टेस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज

(toefl)

अमेरिका सहित दुनिया के 130 देशों के संस्थानों में इसका स्कोर मान्य है। वैसे, तो टॉफेल का स्कोर दो साल के लिए मान्य होता है, लेकिन अधिकतर संस्थान ताजा स्कोर ही मांगते हैं। अब अधिकतर सेंटरों पर आईबीटी यानी इंटरनेट बेस्ड टेस्ट लिया जाता है। टॉफेल टेस्ट में मुख्य रूप से रीडिंग, लिसनिंग, राइटिंग और स्पीकिंग (केवल आईबीटी) की परीक्षा होती है।

www.ets.org

ग्रेजुएट मैनेजमेंट टेस्ट

(GMAT)

मैनेजमेंट कॉलेजों में एडमिशन के लिए जीमैट एग्जाम देना जरूरी होता है। दुनिया में तकरीबन 1,900 ऐसे बिजनेस स्कूल हैं, जहां जीमैट स्कोर मान्य हैं। जीमैट सामान्यतया तीन सेक्शनों में बंटा होता है: एनालिटिकल राइटिंग एसेसमेंट, क्वांटिटेटिव और वर्बल। आमतौर पर इसमें रीजनिंग, कॉम्प्रिहेंशन, प्रॉॅब्लम सॉल्विंग क्वेश्चन आदि से जुडे सवाल पूछे जाते हैं।

http://gmat.learnhub.com

स्कॉलिस्टिक एप्टीट्यूड टेस्ट

(SAT)

अमेरिका के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए सैट यानी स्कॉलिस्टिक एप्टीट्यूड टेस्ट से होकर गुजरना होता है। यह परीक्षा ईटीएस (एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विस) द्वारा संचालित की जाती है। इसके जरिए आपकी समझने की क्षमता, मैथ्स और वर्बल रीजनिंग के ज्ञान की जांच की जाती है। परीक्षा में वस्तुनिष्ठ टाइप प्रश्न पूछे जाते हैं।

www.collegeboard.com

ग्रेजुएट रिकॉर्ड एग्जामिनेशन

(GRE)

अमेरिका के कई ग्रेजुएट कॉलेजों में एडमिशन जीआरई स्कोर के आधार पर होता है। आमतौर पर जीआरई का स्वरूप सैट एग्जाम की तरह की होता है। जीआरई कम्प्यूटर आधारित परीक्षा है।

http://www.greguide.com

मेडिकल कॉलेज एडमिशन टेस्ट

(MCAT)

अमेरिकी यूनिवर्सिटी और कनाडा के उच्च स्तरीय मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए एएएमसी (असोसिएशन ऑफ अमेरिकन मेडिकल कॉलेज) यानी एमकैट आयोजित करता है। एमकैट की परीक्षा में वर्बल रीजनिंग, फिजिकल साइंस, बायोलॉजिकल साइंस और राइटिंग सैंपल से सवाल पूछे जाते हैं। पहले तीन सेक्शन में मल्टीपल च्वाइस टेस्ट होते हैं।

www.aamc.org/mcat

टोईक

(TOEIC)

टोईक अर्थात टेस्ट ऑफ इंग्लिश फॉर इंटरनेशनल कम्युनिकेशन अंग्रेजी भाषा के ज्ञान के लिए होता है। बिजनेस संस्थाएं अंग्रेजी भाषा की परीक्षा लेने के लिए टोईक का उपयोग करती हैं। इसमें कॉर्पोरेट डेवलपमेंट, फाइनेंस, बजटिंग, कॉर्पोरेट प्रॉपर्टी, आईटी,पर्सनल, टेक्निकल मामले, हेल्थ व बिजनेस ट्रेवल से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

http://www.ets.org

लॉ स्कूल एडमिशन टेस्ट

(LSAT)

अमेरिका एवं कनाडा के लॉ कॉलेजों में प्रवेश के लिए यह टेस्ट लिया जाता है। इसमें लॉजिकल रीजनिंग, रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, एनालिटिकल रीजनिंग आदि से सवाल पूछे जाते हैं।

www.lsac.org

जनरल सर्टिफिकेट ऑफ एजुकेशन

(GCE)

यूके से उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल शिक्षा हासिल करने के लिए जीसीई एग्जाम में सफल होना जरूरी है। इसमें दो लेवॅल पर एग्जाम होता है। ए लेवॅल का स्कोर यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए मान्य होता है।

www.britishcouncil.org

amitnidhi@nda.jagran.com

आइए जानते हैं अलग-अलग टेस्ट की तैयारी के लिए क्या रणनीति अपनाएं..

इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्ट और टेस्ट ऑफ इंग्लिश एज ए फॉरेन लैंग्वेज में पूछे जाने वाले प्रश्नों का पैटर्न करीब-करीब एक जैसा ही होता है। इसमें सफल होने के लिए जरूरी है कि अंग्रेजी भाषा पर आपकी पकड अच्छी हो। तैयारी के लिए अंग्रेजी न्यूजपेपर और मैग्जीन नियमित रूप से पढें या फिर आप तैयारी के लिए किसी स्तरीय इंस्टीट्यूट की मदद भी ले सकते हैं।

जीमैट के लिए अंग्रेजी के साथ-साथ मैथ्स पर भी काफी अच्छी पकड होनी चाहिए, इसमे क्रिटिकल रीजनिंग, कॉम्प्रिहेंशन आदि से जुडे सवाल पूछे जाते हैं। लेकिन इस टेस्ट में एक बात और देखी जाती है कि आप कम से कम समय में कितने प्रश्नों को हल कर सकते हैं। इसके लिए नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है। जीआईई और सैट में पूछे जाने वाले प्रश्नों का पैटर्न भी कुछ-कुछ एक जैसा ही होता है। किसी भी संस्थान में एडमिशन अपनी क्षमता और योग्यता को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

आराधना के. महाना,

मैनेजिंग डायरेक्टर

(मानया एजुकेशन प्राइवेट लि., यह संस्थान विदेश

में होने वाली परीक्षाओं की तैयारी कराता है)